श्रीराम कथा: हनुमत चरित के ओज और माता शबरी की अटूट भक्ति से भावविभोर हुए श्रद्धालु

एडिटर विनीत पाण्डेय की स्पेशल रिपोर्ट

श्रीराम कथा: हनुमत चरित के ओज और माता शबरी की अटूट भक्ति से भावविभोर हुए श्रद्धालु
फतेहपुर: उत्तम उद्योग व्यापार मंडल उत्तर प्रदेश के तत्वावधान में आयोजित भव्य ‘श्रीराम कथा’ में हनुमत चरित और माता शबरी के प्रसंगों का सजीव वर्णन किया गया। कथा व्यास परम श्रद्धेय श्री चंदन कृष्ण जी महाराज ने प्रभु श्री राम के प्रति हनुमान जी के निस्वार्थ समर्पण और माता शबरी के धैर्यपूर्ण प्रतीक्षा की महिमा गाकर पाण्डाल में उपस्थित हजारों भक्तों को भाव-विभोर कर दिया।
आज की कथा का मुख्य केंद्र ‘हनुमत चरित’ रहा। कथावाचक ने बताया कि हनुमान जी केवल शक्ति के प्रतीक नहीं, बल्कि बुद्धि और विवेक के भी पुंज हैं।
जब ऋष्यमूक पर्वत पर हनुमान जी पहली बार ब्राह्मण वेश में प्रभु श्री राम से मिलते हैं, तो वह शरणागति की पराकाष्ठा है।
लंका दहन से लेकर लक्ष्मण के प्राण बचाने हेतु द्रोणागिरी पर्वत उठाने तक, हनुमान जी का हर कार्य ‘राम काज’ के प्रति उनकी निष्ठा को दर्शाता है।
सीख: हनुमान जी का चरित्र हमें सिखाता है कि अपार शक्ति होने के बावजूद व्यक्ति को सदैव विनम्र और सेवाभावी बने रहना चाहिए।
कथा के दौरान माता शबरी की मनमोहक झांकी ने सभी का मन मोह लिया। इस प्रसंग के दौरान पूरा पाण्डाल ‘राम ही राम’ के जयघोष से गूंज उठा।
वृद्धा शबरी का प्रतिदिन अपनी कुटिया को बुहारना और मीठे बेर चुनकर लाना, इस विश्वास का प्रतीक था कि “मेरे राम एक दिन अवश्य आएंगे।”
प्रभु श्री राम द्वारा शबरी के जूठे बेर खाना यह संदेश देता है कि ईश्वर केवल भाव के भूखे हैं, वे जाति या कुल नहीं देखते।
भगवान राम ने शबरी को जो ‘नवधा भक्ति’ का उपदेश दिया, उसे कथा के माध्यम से विस्तार से समझाया गया।
कथा के मध्य भजनों पर भक्त झूम उठे। हनुमान जी और माता शबरी के सजीव पात्रों द्वारा प्रस्तुत मनमोहक दृश्यों ने आध्यात्मिक वातावरण को और भी दिव्य बना दिया। आरती के पश्चात सभी भक्तों को प्रसाद वितरण किया गया।
मुख्य अतिथि स्वरूप संत शिरोमणि श्री श्री 1008 श्री राम नारायण दास श्री त्यागी जी महाराज जी ने सभी श्रद्धालुओं को आशीर्वचन से अभिसिंचित किया।
“मम दर्शन फल परम अनूपा, जीव पाव निज सहज सरूपा।”
(प्रभु के दर्शन का फल अनुपम है, जो भक्त को उसके वास्तविक स्वरूप से मिला देता है।)
उपरोक्त कथा स्थल पर धनंजय मिश्रा, a
मनोज साहू,आकाश भदौरिया,जय किशन,श्रवण दीक्षित अनिल महाजन ,प्रेमदत्त उमराव,संदीप श्रीवास्तव,गंगाशरण करवरिया ,संजय सिंह,सोनू शुक्ला, सनी,सौरभ गुप्ता,सहित हजारों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे

  • Gopal Ji Nirmit

    निर्मित द्विवेदी जीवनी निर्मित द्विवेदी, जिन्हें "गोपाल जी" के नाम से भी जाना जाता है, एक शिक्षक, पत्रकार और समाजसेवी हैं। उनका जन्म 15 मई 1996 को फतेहपुर, उत्तर प्रदेश के खजुहा में हुआ था। उन्होंने हाईस्कूल श्री पुरुषोत्तम इंटर कॉलेज खजुहा, इंटर दयानंद इंटर कॉलेज बिंदकी से किया। इसके बाद CSJMU कानपुर से B.Sc., इलाहाबाद विश्वविद्यालय से M.Sc. और राजेंद्र प्रसाद राज्जू भैया विश्वविद्यालय प्रयागराज से B.Ed. की डिग्री ली। पिछले 6 वर्षों से वह फतेहपुर के विकास विद्या मंदिर इंटर कॉलेज जहानाबाद में रसायन विज्ञान के PGT व्याख्याता हैं। शिक्षा के साथ-साथ वे पत्रकारिता और सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय हैं।

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