कलम और माइक के बाद अब कानून की आवाज बनेंगे अमजद खान
बिंदकी के होनहार पत्रकार ने पूरा किया वकालतनामा, पीड़ितों और असहायों की मदद का लिया संकल्प
बिंदकी, फतेहपुर।
अमजद खान सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि उन पीड़ितों, असहायों और गरीबों की आवाज हैं, जो अपनी समस्याओं को अधिकारियों और जिम्मेदारों के सामने रखने से भी कई बार डरते हैं। पत्रकारिता के सफर में उन्होंने कभी हाथ में माइक थामा तो कभी सच की कलम को हथियार बनाया और निडर, निर्भीक एवं निष्पक्ष होकर आमजन की आवाज को बुलंद किया।
अब अमजद खान ने अपने जीवन की एक नई पारी की शुरुआत की है। वकालतनामा पूरा कर उन्होंने अधिवक्ता के रूप में कानून के क्षेत्र में कदम रखा है। पत्रकारिता के माध्यम से समाज की समस्याओं को सामने रखने के बाद अब वह कानून की पाठशाला और न्याय के मंदिर से जरूरतमंदों की लड़ाई लड़ने की तैयारी में हैं।
अमजद खान की पहचान बिंदकी कस्बे के एक सक्रिय और जुझारू पत्रकार के रूप में रही है। उन्होंने अपनी कलम और माइक के माध्यम से समय-समय पर गरीब, पीड़ित और असहाय लोगों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। अब अधिवक्ता बनने के बाद उनसे उम्मीदें और भी बढ़ गई हैं।
पत्रकारिता से जनहित की आवाज और अब वकालत से न्याय की लड़ाई—अमजद खान की यह नई यात्रा समाज के उन लोगों के लिए उम्मीद की किरण बन सकती है, जो आर्थिक या सामाजिक परिस्थितियों के कारण अपनी बात मजबूती से नहीं रख पाते।
अमजद खान का यह नया कदम सिर्फ उनके व्यक्तिगत करियर की उपलब्धि नहीं, बल्कि जनसेवा के उनके संकल्प का विस्तार माना जा रहा है। बिंदकी क्षेत्र के लोगों को उम्मीद है कि पत्रकारिता की तरह वकालत के क्षेत्र में भी वह निडरता, निष्पक्षता और ईमानदारी के साथ जरूरतमंदों की आवाज बनकर न्याय की लड़ाई लड़ेंगे।
माइक से उठी आवाज अब अदालत तक पहुंचेगी—कलम के सिपाही अमजद खान अब कानून के जरिए इंसाफ की लड़ाई लड़ने को तैयार हैं।






