इंटरनेट के बढ़ते प्रभाव से सिमटता ननिहाल का अपनापन
बेअंत सिंह की कलम से –
एक समय था जब गर्मी की छुट्टियों का नाम आते ही बच्चों के चेहरे खिल उठते थे। उनकी पहली इच्छा होती थी कि वे अपने ननिहाल जाएँ, जहाँ नानी का स्नेह, नाना का दुलार, मामा-मामी का प्यार और पूरे परिवार के साथ बिताए गए अनमोल पल जीवनभर की याद बन जाते थे।
लेकिन आज इंटरनेट और स्मार्टफोन के बढ़ते प्रभाव ने इस परंपरा को काफी हद तक बदल रहा है।अब अधिकांश बच्चे छुट्टियों में ननिहाल जाने के बजाय घर के एक कमरे में बैठकर मोबाइल पर रील देखने, ऑनलाइन गेम खेलने और सोशल मीडिया में समय बिताने लगे हैं। धीरे-धीरे वे अपने रिश्तों की गर्माहट और परिवार के साथ बिताए जाने वाले सुनहरे पलों से दूर होते जा रहे हैं।
तकनीक का उपयोग आवश्यक है, लेकिन यदि वही रिश्तों की मिठास और पारिवारिक संस्कारों की जगह लेने लगे, तो यह चिंता का विषय है। बच्चों को डिजिटल दुनिया के साथ-साथ अपने परिवार, रिश्तों और भारतीय संस्कृति से भी जोड़कर रखना हम सभी की जिम्मेदारी है।
आइए, इस गर्मी की छुट्टियों में बच्चों को एक बार फिर ननिहाल की ओर ले चलें, ताकि वे मोबाइल की स्क्रीन से बाहर निकलकर अपने अपनों का स्नेह, अपनापन और बचपन की असली खुशियाँ महसूस कर सकें।












